उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी और देवता
उत्तर फाल्गुनी
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र क्या है और उसकी विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य है और देवता अर्यमा। यह सत्ताईस नक्षत्रों में 12वाँ है, जो सिंह 26°40′–कन्या 10°00′ तक फैला है। अनुबंध और संरक्षण का नक्षत्र, विवाह मुहूर्त में विशेष रूप से माना जाने वाला। जन्म के समय चंद्रमा इस नक्षत्र में हो तो विंशोत्तरी दशा क्रम सूर्य से आरंभ होता है।
अर्यमा और निभाने का भाव
उत्तर फाल्गुनी के देवता अर्यमा हैं, जिन्हें संरक्षण, अनुबंध और मित्रता निभाने से जोड़ा जाता है। यही कारण है कि विवाह मुहूर्त की शास्त्रीय सूचियों में यह नक्षत्र लगभग सदा आता है।
प्रतीक शय्या के पिछले पाए हैं — वे जो भार सँभालते हैं। पूर्व फाल्गुनी के साथ मिलकर यह जोड़ी आनंद और उसे निभाने की ज़िम्मेदारी, दोनों को दर्शाती है।
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र के नाम अक्षर
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र के चार पाद हैं और हर पाद का अपना नाम अक्षर है: पहला पाद (सिंह) — टे; दूसरा पाद (कन्या) — टो; तीसरा पाद (कन्या) — पा; चौथा पाद (कन्या) — पी। परंपरा में बच्चे का नाम उसी अक्षर से शुरू किया जाता है जिस पाद में जन्म के समय चंद्रमा था।
इसलिए केवल "उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र" जान लेना काफ़ी नहीं — चारों अक्षर (टे, टो, पा, पी) में से सही एक, पाद से ही तय होता है, और पाद हर 3°20′ पर बदल जाता है। ये अक्षर दृक पंचांग की नक्षत्र-पाद स्वर तालिका से लिए गए हैं।
दो राशियों में और सूर्य का स्वामित्व
इसका पहला पाद सिंह में और शेष तीन कन्या में पड़ते हैं। सिंह सूर्य की राशि है और इस नक्षत्र का स्वामी भी सूर्य — इसलिए पहला पाद विशेष रूप से बलवान माना जाता है।
शेष तीन पाद कन्या में हैं, जहाँ बुध उच्च होता है। यही कारण है कि इस नक्षत्र के विभिन्न पादों में जन्मे व्यक्तियों की चंद्र राशि और नवांश दोनों भिन्न होते हैं, जबकि दशा क्रम सबका सूर्य से ही आरंभ होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- उत्तर फाल्गुनी का स्वामी कौन है?
- सूर्य। इसमें चंद्रमा हो तो जीवन सूर्य की छह वर्ष की महादशा से आरंभ होता है — विंशोत्तरी की सबसे छोटी दशा।
- उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?
- पहला पाद (सिंह) — टे; दूसरा पाद (कन्या) — टो; तीसरा पाद (कन्या) — पा; चौथा पाद (कन्या) — पी। नाम उस पाद के अक्षर से रखा जाता है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था।
- उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र के देवता कौन हैं?
- उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र के अधिष्ठाता अर्यमा — संरक्षण और अनुबंध के देवता हैं।
- उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र किस राशि में आता है?
- उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र सिंह 26°40′–कन्या 10°00′ तक फैला है।
- उत्तर फाल्गुनी को विवाह के लिए शुभ क्यों माना जाता है?
- उसके देवता अर्यमा हैं, जिन्हें अनुबंध और संरक्षण से जोड़ा जाता है। शास्त्रीय विवाह मुहूर्त सूचियों में यह नक्षत्र लगभग सदा सम्मिलित रहता है।
- उत्तर फाल्गुनी किन राशियों में आता है?
- पहला पाद सिंह में और शेष तीन कन्या में।
