बारह राशियाँ — स्वामी, तत्त्व और नक्षत्र

द्वादश राशि

वैदिक ज्योतिष में बारह राशियाँ कौन-सी हैं?

बारह राशियाँ निरयण राशिचक्र के तीस-तीस अंश के भाग हैं — मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन। भारतीय परंपरा में 'आपकी राशि' का अर्थ जन्म के समय चंद्रमा की राशि है, सूर्य की नहीं — सूर्य राशि पश्चिमी पद्धति की बात है।

वैदिक ज्योतिष राशियों को स्थिर तारों के सापेक्ष नापता है, जबकि पश्चिमी ज्योतिष विषुव से। दोनों के बीच अब लगभग 24 अंश का अंतर आ चुका है, और यही कारण है कि जिस राशि को आप बचपन से अपनी मानते आए हैं, वैदिक कुंडली में प्रायः उससे पिछली राशि निकलती है। यहाँ हर गणना लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश से होती है, जो भारत का मानक है।

किसी भी राशि को समझने के लिए चार बातें लगभग पर्याप्त हैं: उसका स्वामी, तत्त्व, गुण, और उसमें पड़ने वाले नक्षत्र। इनके साथ यह भी देखा जाता है कि उस राशि में किस ग्रह का उच्च या नीच पड़ता है, क्योंकि वही उस राशि की सबसे विशिष्ट पहचान होती है।

मेषमंगल · अग्निअश्विनी, भरणी, कृत्तिका (पहला पाद)वृषभशुक्र · पृथ्वीकृत्तिका (पाद 2–4), रोहिणी, मृगशिरा (पाद 1–2)मिथुनबुध · वायुमृगशिरा (पाद 3–4), आर्द्रा, पुनर्वसु (पाद 1–3)कर्कचंद्र · जलपुनर्वसु (चौथा पाद), पुष्य, आश्लेषासिंहसूर्य · अग्निमघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी (पहला पाद)कन्याबुध · पृथ्वीउत्तराफाल्गुनी (पाद 2–4), हस्त, चित्रा (पाद 1–2)तुलाशुक्र · वायुचित्रा (पाद 3–4), स्वाति, विशाखा (पाद 1–3)वृश्चिकमंगल · जलविशाखा (चौथा पाद), अनुराधा, ज्येष्ठाधनुगुरु · अग्निमूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा (पहला पाद)मकरशनि · पृथ्वीउत्तराषाढ़ा (पाद 2–4), श्रवण, धनिष्ठा (पाद 1–2)कुंभशनि · वायुधनिष्ठा (पाद 3–4), शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद (पाद 1–3)मीनगुरु · जलपूर्वाभाद्रपद (चौथा पाद), उत्तराभाद्रपद, रेवती

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