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दिशा, समय और अगले तीन साल — आपकी कुंडली के दसवें भाव से।

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प्रेम पत्रिका

विवाह का समय, मंगल दोष की सच्चाई, और जीवनसाथी का स्वभाव।

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भविष्य पत्रिका

आने वाले वर्षों का भविष्यफल — दशा और गोचर, दोनों से।

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संपूर्ण जीवन पत्रिका

करियर, प्रेम और भविष्य — तीनों एक साथ, रत्न और जन्म पंचांग सहित।

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बुनियादी बातें

कुंडली किन चीज़ों से बनती है

चार चीज़ें, जिनकी गिनती छह सौ साल से एक जैसी है। इस साइट की हर पत्रिका इन्हीं से बनती है।

What a janam kundli contains →
9

ग्रह

सूर्य से केतु तक। हर ग्रह जीवन का अलग विभाग संभालता है, और हर एक आपकी कुंडली में कहीं न कहीं बैठा है।

12

भाव

वे बारह क्षेत्र जिनमें कुंडली जीवन को बाँटती है — शरीर और धन से लेकर विवाह और व्यय तक।

27

नक्षत्र

चंद्रमा के सत्ताईस पड़ाव। जन्म के समय वह जिसमें था, वही आपकी पूरी दशा-क्रम तय करता है।

120

वर्ष

विंशोत्तरी दशा का पूरा चक्र, वर्षों में, जो नौ ग्रहों में बँटा होता है।

बारह राशियाँ

राशिचक्र, और हर राशि किस चीज़ से बनी है

कोई राशि चुनिए — उसका स्वामी ग्रह, तत्व और उस ग्रह का एक सरल उपाय दिखेगा।

All twelve rashis, in detail →
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मेष

स्वामी ग्रह
मंगल
तत्व
अग्नि
प्रकृति
चर

स्वामी ग्रह का एक सरल उपाय

मंगलवार। ॐ अंगारकाय नमः कहें। मसूर दाल दान करें; क्रोध पर संयम रखें।

यह राशि के बारे में है, आपके बारे में नहीं। असली विश्लेषण आपकी अपनी कुंडली के बारहों भावों से होता है — आपको जो राशि बताई गई है, वह उसकी सिर्फ़ शुरुआत है।

सीधी बात

चार बातें जो आपसे शायद कही गई हैं

“मंगल दोष है तो विवाह टूटेगा।”

उन भावों में मंगल होना आम बात है, और शास्त्रों में कई शर्तें हैं जो इसे पूरी तरह रद्द कर देती हैं। जो विश्लेषण “आप मांगलिक हैं” पर रुक जाए, उसने असली काम किया ही नहीं — भंग की शर्तें ही असली काम हैं।

“साढ़े साती यानी साढ़े सात साल की मुसीबत।”

यह चंद्रमा के आसपास की तीन राशियों से शनि का गुज़रना है। इसके तीन अलग चरण होते हैं, तीनों का भार एक जैसा नहीं होता, और कितना भारी पड़ेगा यह आपकी अपनी कुंडली में शनि की स्थिति पर निर्भर करता है।

“काल सर्प सब बर्बाद कर देता है।”

सारे ग्रह सचमुच राहु-केतु अक्ष के एक ही तरफ़ हैं या नहीं — यह हाँ या ना की गणना है, और पूर्ण से कहीं ज़्यादा आम आंशिक स्थिति होती है। आपके साथ कौन-सी है, यह जानना ज़रूरी है।

“सही रत्न सब ठीक कर देगा।”

हो सकता है। हम ज़्यादा से ज़्यादा एक सुझाते हैं, वह भी किसी ज्योतिषी को कुंडली प्रत्यक्ष दिखाने के बाद। हम रत्न बेचते नहीं, इसलिए इस सलाह में हमारा कोई फ़ायदा नहीं।

शब्दावली

जो शब्द आपकी पत्रिका में आएंगे

बेवजह की भारी भाषा नहीं — ये वे शब्द हैं जिनके बिना वैदिक विश्लेषण हो ही नहीं सकता, तो हर एक का मतलब यहाँ है।

The full Vedic astrology glossary →
लग्न
जन्म के जिस मिनट पर पूर्वी क्षितिज पर जो राशि उदय हो रही थी। पूरी कुंडली उसी से सजती है — इसीलिए जन्म समय इतना मायने रखता है।
दशा
वह ग्रह-काल जिससे आप गुज़र रहे हैं। विंशोत्तरी 120 वर्षों को नौ ग्रहों में बाँटती है, और क्रम आपके जन्म नक्षत्र से तय होता है।
गोचर
आज ग्रह कहाँ हैं, और जन्म के समय कहाँ थे — दोनों का मिलान। शनि और गुरु जैसे धीमे ग्रह सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं।
योग
ग्रहों का वह विशेष मेल जिसे शास्त्रों ने नाम देकर वर्णित किया है। कुछ प्रसिद्ध हैं, ज़्यादातर शर्तों पर टिके हैं — और शर्तें ही असली बात हैं।
दोष
कुंडली में कोई कमी। लगभग हर दोष की शास्त्रीय भंग-शर्तें होती हैं, इसीलिए अकेला शब्द बहुत कम बताता है।
अंतर्दशा
दशा के भीतर का उप-काल। अक्सर यही समझाता है कि एक लंबी दशा के भीतर एक साल दूसरे से इतना अलग क्यों लगा।

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★★★★★

“saab baate sach likhe they aur mai ye report pard ke bhaot prashann huya”
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

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