नक्षत्र कैलकुलेटर
नक्षत्र कैलकुलेटर
मेरा जन्म नक्षत्र और पाद कौन-सा है?
आपका जन्म नक्षत्र वह चंद्र नक्षत्र है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था — सत्ताईस में से एक, हर एक 13°20′ का, और हर एक चार पादों में बँटा हुआ। यह कैलकुलेटर नक्षत्र, पाद, उसका स्वामी ग्रह और गण-योनि-नाड़ी बताता है, जो विंशोत्तरी दशा और कुंडली मिलान दोनों का आधार हैं।
जन्म नक्षत्र कुंडली की सबसे निर्णायक स्थिति क्यों है
चंद्रमा का नक्षत्र केवल एक और विवरण नहीं है — पूरी विंशोत्तरी दशा का क्रम इसी से तय होता है। जन्म के समय चंद्रमा उस नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था, इससे यह निकलता है कि पहली महादशा कौन-सी होगी और कितनी बची होगी, और उसी से जीवन भर की दशा-अंतर्दशा की पूरी शृंखला बनती है। यही कारण है कि दो लोग एक ही दिन जन्मे होकर भी बिलकुल अलग दशा क्रम में चल सकते हैं।
पाद क्यों मायने रखता है
हर नक्षत्र चार पादों में बँटा है, और पाद यह तय करता है कि नवांश (D9) कुंडली में चंद्रमा किस राशि में बैठेगा। नवांश को परंपरा में विवाह और भाग्य के लिए पढ़ा जाता है, इसलिए पाद का अंतर छोटा नहीं है। नामकरण की परंपरा में भी अक्षर पाद से ही तय होता है — यही वजह है कि एक ही नक्षत्र के चार पादों के लिए चार अलग अक्षर होते हैं। पाद 3°20′ का होता है, इसलिए इसके लिए जन्म समय ठीक-ठाक सही होना चाहिए।
गण, योनि और नाड़ी — मिलान का आधार
हर नक्षत्र को एक गण (देव, मनुष्य या राक्षस), एक योनि और एक नाड़ी दी गई है। कुंडली मिलान के आठ कूटों में से तीन सीधे इन्हीं से निकलते हैं — गण 6 अंक का, योनि 4 अंक की, और नाड़ी 8 अंक की, जो सबसे बड़ा भार है। यानी 36 में से 18 अंक अकेले जन्म नक्षत्र से तय होते हैं, इसीलिए मिलान से पहले नक्षत्र ठीक से जान लेना ज़रूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नक्षत्र निकालने के लिए जन्म समय कितना सही चाहिए?
- चंद्रमा एक नक्षत्र लगभग एक दिन में पार करता है, इसलिए नक्षत्र के लिए मोटा समय भी अक्सर चल जाता है। पाद के लिए ज़्यादा सटीकता चाहिए, क्योंकि हर पाद केवल 3°20′ का होता है — यानी करीब छह घंटे।
- नक्षत्र से बच्चे का नाम कैसे तय होता है?
- हर नक्षत्र के चार पादों के लिए एक-एक निर्धारित अक्षर होता है, और परंपरा में नाम उसी अक्षर से शुरू किया जाता है। इसीलिए नामकरण के लिए नक्षत्र के साथ पाद जानना ज़रूरी है।
- नक्षत्र का स्वामी ग्रह क्या होता है?
- हर नक्षत्र का एक विंशोत्तरी स्वामी होता है, और नौ स्वामी सत्ताईस नक्षत्रों में तीन बार दोहराए जाते हैं। यह स्वामी तय करता है कि आपकी पहली महादशा कौन-सी होगी।
- क्या नक्षत्र राशि से अलग होता है?
- हाँ। राशि आकाश के बारह भागों में से एक है, नक्षत्र सत्ताईस में से एक — यानी नक्षत्र कहीं महीन विभाजन है। एक राशि में सवा दो नक्षत्र आते हैं, इसलिए एक ही राशि वाले दो लोगों के नक्षत्र अलग हो सकते हैं।
