लो शू ग्रिड कैलकुलेटर
लो शू ग्रिड
मेरी जन्म तिथि से लो शू ग्रिड क्या बनता है?
लो शू ग्रिड एक तीन-गुणा-तीन का खाना है जिसमें आपकी पूरी जन्म तिथि के अंक अपनी-अपनी जगह भरे जाते हैं। कौन-सा अंक कितनी बार आया और कौन-सा बिल्कुल नहीं आया — यही ग्रिड का पूरा पठन है।
ग्रिड कैसे भरा जाता है
जन्म तिथि के सभी अंक — दिन, महीना और वर्ष — लेकर हर अंक को ग्रिड में उसकी निश्चित जगह पर रखा जाता है। कोई अंक दो या तीन बार आए तो वह उतनी बार लिखा जाता है, और जो अंक तिथि में है ही नहीं वह खाना खाली रह जाता है। पठन इन्हीं दोहरावों और खाली खानों से होता है — कोई अंक बार-बार आना उस गुण की प्रबलता माना जाता है, और अनुपस्थिति उस दिशा में कमी।
पंक्तियाँ और स्तंभ
पारंपरिक पठन में ग्रिड की पूरी पंक्तियाँ, स्तंभ और विकर्ण भी देखे जाते हैं। तीनों अंक मौजूद हों तो उसे पूर्ण योग माना जाता है और उस दिशा को प्रबल पढ़ा जाता है। यह ग्रिड की एक और परत है जो अकेले अंकों की गिनती से आगे जाती है।
यह वैदिक पद्धति नहीं है
लो शू ग्रिड चीनी अंक परंपरा से आती है, वैदिक ज्योतिष से नहीं। भारत में यह अंक ज्योतिष के साथ प्रचलित हो गई है और इसीलिए यहाँ उपलब्ध है, पर इसे मूलांक-भाग्यांक या कुंडली के समकक्ष मानना ठीक नहीं। इसे साफ़ बता देना ज़्यादा ईमानदार है, बजाय इसके कि इसे भी 'वैदिक' कहकर पेश किया जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- लो शू ग्रिड क्या है?
- एक 3×3 का खाना जिसमें आपकी पूरी जन्म तिथि के अंक अपनी निश्चित जगह पर भरे जाते हैं। दोहराए गए और अनुपस्थित अंकों से पठन होता है।
- खाली खाने का क्या मतलब है?
- इसका अर्थ है कि वह अंक आपकी जन्म तिथि में कहीं नहीं आया। परंपरा इसे उस अंक से जुड़े गुण की कमी के रूप में पढ़ती है।
- क्या लो शू ग्रिड वैदिक ज्योतिष का हिस्सा है?
- नहीं। यह चीनी अंक परंपरा से आती है। भारत में यह अंक ज्योतिष के साथ प्रचलित हुई है, पर यह जन्म कुंडली या मूलांक-भाग्यांक की पद्धति से अलग है।
- क्या इसके लिए जन्म समय चाहिए?
- नहीं। ग्रिड केवल जन्म तिथि के अंकों से बनता है — जन्म समय और स्थान इसमें कहीं नहीं आते। यही इसे जन्म कुंडली से अलग करता है, जो तीनों लेती है।
