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वैदिक ज्योतिष पर लेख, और वह संदर्भ सामग्री जिस पर VedikPatrika की हर रिपोर्ट टिकी है — शास्त्रीय तथ्य सीधे शब्दों में, परंपराओं के बीच के मतभेद छिपाए बिना, और दोषों के वे निवारण-नियम जिन्हें अधिकांश पृष्ठ चुपचाप छोड़ देते हैं।

एक बात शुरू में ही। कुंडली में ग्रहों की स्थिति खगोल विज्ञान है, और उतनी ही सटीक है जितनी पंचांग गणना अनुमति देती है। उन स्थितियों से जो अर्थ निकाला जाता है, वह एक पारंपरिक पद्धति के भीतर की व्याख्या है — अपनी आंतरिक तर्क-व्यवस्था वाली एक पुरानी परंपरा, पर प्रयोगों से सिद्ध विज्ञान नहीं। यहाँ कुछ भी चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।

संदर्भ

वैदिक ज्योतिष क्या है?

वैदिक ज्योतिष, या ज्योतिष शास्त्र, जन्म कुंडली पढ़ने की भारतीय पद्धति है, जिसमें नौ ग्रहों की निरयण स्थिति को बारह भावों और सत्ताईस नक्षत्रों में देखा जाता है। यह पश्चिमी ज्योतिष से तीन मुख्य बातों में अलग है: यह सायन नहीं, निरयण राशिचक्र प्रयोग करता है; इसमें सूर्य के बजाय चंद्रमा मुख्य आधार है; और इसमें विंशोत्तरी दशा जैसी समय-निर्धारण पद्धति है, जिसके बराबर पश्चिमी परंपरा में कुछ नहीं है।

कुंडली क्या हैजन्म कुंडली के लिए ज़रूरी तीन जानकारियाँ, उसमें असल में क्या होता है, और वह ईमानदारी से क्या बता सकती है और क्या नहीं।नौ ग्रह09सूर्य से केतु तक — राशि स्वामित्व, उच्च-नीच अंश, दृष्टियाँ, दशा वर्ष और शास्त्रीय उपाय।बारह राशियाँ12निरयण राशियाँ, उनके स्वामी, तत्त्व और गुण, और आपकी वैदिक राशि पश्चिमी राशि से अलग क्यों होती है।बारह भाव12कुंडली का हर भाव जीवन के किस क्षेत्र को दर्शाता है, उसका कारक ग्रह, और केंद्र / त्रिकोण / दुस्थान वर्गीकरण।27 नक्षत्र27सटीक अंश-विस्तार, विंशोत्तरी स्वामी, देवता, प्रतीक, गण, योनि और नाड़ी — पूरा शास्त्रीय संदर्भ, हर नक्षत्र का अलग पृष्ठ।विंशोत्तरी दशा120 वर्षों की वह दशा पद्धति जो कुंडली को समय-रेखा देती है, और जन्म के समय चंद्र नक्षत्र उसे कैसे तय करता है।दोष05मंगल दोष, काल सर्प, साढ़े साती और पितृ दोष — उन निवारण-नियमों के साथ जिन्हें अधिकांश पठन छोड़ देते हैं।कुंडली मिलान08अष्टकूट मिलान, एक-एक कूट करके — वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी, और हर कूट असल में क्या जाँचता है।मुहूर्त03विवाह, गृह प्रवेश या किसी और कार्य के लिए शुभ समय चुनना — पंचांग के वे तत्त्व जो एक तिथि को दूसरी से बेहतर बनाते हैं।योग09हर प्रसिद्ध योग को असल में क्या चाहिए — गजकेसरी, पंच महापुरुष, राज योग, धन योग — शास्त्रीय स्रोत के साथ, और वह कितना आम है।गोचर04शनि, गुरु और राहु-केतु की चाल कैसे पढ़ी जाती है — चंद्र राशि से गिनकर, और क्यों नीचे चल रही दशा तय करती है कि गोचर क्या फल देगा।जन्म समय और कुंडली की सटीकता03सटीक जन्म समय के बिना कुंडली क्या बता सकती है, 143 कुंडलियों पर मापा गया — और एक ही जन्म विवरण से अलग-अलग वेबसाइटों पर अलग कुंडली क्यों बनती है।वर्ग कुंडलियाँ05नवांश, दशमांश और षोडशवर्ग की बाकी कुंडलियाँ — हर विभाजन की गणना, वह किस लिए देखा जाता है, और उसे कितने सटीक जन्म समय की ज़रूरत है।अष्टकवर्ग02बिंदु गणना पद्धति: आपकी कुंडली के अंक क्या गिनते हैं, हर कुंडली का योग 337 क्यों होता है, और गोचर परखने में उनका प्रयोग।वर्षफल01सौर वापसी पर बनी वार्षिक कुंडली — मुंथा, वर्षेश, और यह ताजिक पद्धति क्यों है, जन्म कुंडली का विस्तार नहीं।जैमिनी ज्योतिष08हर ग्रह के आत्मकारक होने का अर्थ, कारकांश, और उससे बारहवीं राशि से इष्ट देवता कैसे पढ़ा जाता है।अंक ज्योतिष09जन्म तिथि से मूलांक और भाग्यांक, और कैल्डियन नामांक — हर एक का अर्थ और उसकी गणना।शब्दावली31किसी भी पठन में मिलने वाले संस्कृत शब्दों की सरल परिभाषाएँ।

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