शतभिषा नक्षत्र का स्वामी कौन है? देवता और विशेषताएँ
शतभिषा
शतभिषा नक्षत्र क्या है और उसकी विशेषताएँ क्या हैं?
शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है और देवता वरुण। यह सत्ताईस नक्षत्रों में 24वाँ है, जो कुंभ 6°40′–20°00′ तक फैला है। नाम का अर्थ ही 'सौ वैद्य' — उपचार और अनुसंधान का नक्षत्र। जन्म के समय चंद्रमा इस नक्षत्र में हो तो विंशोत्तरी दशा क्रम राहु से आरंभ होता है।
सौ वैद्य और वरुण का नियम
शतभिषा का अर्थ सौ औषधियाँ या सौ वैद्य बताया गया है, और देवता वरुण हैं — जल तथा ब्रह्मांडीय नियम के अधिपति। प्रतीक एक रिक्त वृत्त है।
यह संयोजन इस नक्षत्र को उपचार, अनुसंधान और छिपे हुए को खोजने से जोड़ता है। वरुण का नियम-अधिपति होना इसमें व्यवस्था और गोपन दोनों जोड़ देता है।
शतभिषा नक्षत्र के नाम अक्षर
शतभिषा नक्षत्र के चार पाद हैं और हर पाद का अपना नाम अक्षर है: पहला पाद (कुंभ) — गो; दूसरा पाद (कुंभ) — सा; तीसरा पाद (कुंभ) — सी; चौथा पाद (कुंभ) — सू। परंपरा में बच्चे का नाम उसी अक्षर से शुरू किया जाता है जिस पाद में जन्म के समय चंद्रमा था।
इसलिए केवल "शतभिषा नक्षत्र" जान लेना काफ़ी नहीं — चारों अक्षर (गो, सा, सी, सू) में से सही एक, पाद से ही तय होता है, और पाद हर 3°20′ पर बदल जाता है। ये अक्षर दृक पंचांग की नक्षत्र-पाद स्वर तालिका से लिए गए हैं।
कुंभ राशि और राहु का स्वामित्व
शतभिषा कुंभ राशि में पड़ता है, जिसका स्वामी शनि है और जिसका सह-स्वामित्व परंपरा में राहु से जोड़ा जाता है। और इस नक्षत्र का विंशोत्तरी स्वामी भी राहु ही है।
यही कारण है कि कुंभ का यह भाग अनुसंधान, तकनीक और अपरंपरागत मार्गों से सबसे अधिक जोड़ा जाता है। राशि और नक्षत्र दोनों का संकेत यहाँ एक ही दिशा में जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
- राहु। यह कुंभ राशि में पड़ता है, जिसका सह-स्वामित्व भी परंपरा में राहु से जोड़ा जाता है।
- शतभिषा नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?
- पहला पाद (कुंभ) — गो; दूसरा पाद (कुंभ) — सा; तीसरा पाद (कुंभ) — सी; चौथा पाद (कुंभ) — सू। नाम उस पाद के अक्षर से रखा जाता है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था।
- शतभिषा नक्षत्र के देवता कौन हैं?
- शतभिषा नक्षत्र के अधिष्ठाता वरुण — जल और नियम के देवता हैं।
- शतभिषा किस राशि में आता है?
- कुंभ में, 6°40′ से 20° तक। पूरा नक्षत्र एक ही राशि में पड़ता है।
- शतभिषा नक्षत्र का अर्थ क्या है?
- सौ औषधियाँ या सौ वैद्य। देवता वरुण हैं और प्रतीक एक रिक्त वृत्त।
