उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी और देवता

उत्तराषाढ़ा

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र क्या है और उसकी विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी सूर्य है और देवता विश्वेदेवा। यह सत्ताईस नक्षत्रों में 21वाँ है, जो धनु 26°40′–मकर 10°00′ तक फैला है। विश्वेदेवा का नक्षत्र, और अभिजित मुहूर्त इसी के आसपास पड़ता है। जन्म के समय चंद्रमा इस नक्षत्र में हो तो विंशोत्तरी दशा क्रम सूर्य से आरंभ होता है।

विश्वेदेवा और स्थायी विजय

उत्तराषाढ़ा के देवता विश्वेदेवा हैं — सभी देवता एक साथ। शास्त्र में इसे उस विजय से जोड़ा गया है जो टिकती है, पूर्वाषाढ़ा की तात्कालिक विजय से आगे।

इसका विंशोत्तरी स्वामी सूर्य है, जो अधिकार और प्रतिष्ठा का कारक है। देवता और स्वामी दोनों स्थायित्व तथा सर्वस्वीकृति की ओर संकेत करते हैं।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के नाम अक्षर

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चार पाद हैं और हर पाद का अपना नाम अक्षर है: पहला पाद (धनु) — भे; दूसरा पाद (मकर) — भो; तीसरा पाद (मकर) — जा; चौथा पाद (मकर) — जी। परंपरा में बच्चे का नाम उसी अक्षर से शुरू किया जाता है जिस पाद में जन्म के समय चंद्रमा था।

इसलिए केवल "उत्तराषाढ़ा नक्षत्र" जान लेना काफ़ी नहीं — चारों अक्षर (भे, भो, जा, जी) में से सही एक, पाद से ही तय होता है, और पाद हर 3°20′ पर बदल जाता है। ये अक्षर दृक पंचांग की नक्षत्र-पाद स्वर तालिका से लिए गए हैं।

अभिजित और अट्ठाईसवाँ नक्षत्र

प्राचीन परंपरा में अट्ठाईस नक्षत्रों की गणना भी मिलती है, जिसमें अभिजित नाम का एक अतिरिक्त नक्षत्र उत्तराषाढ़ा के अंत और श्रवण के आरंभ के बीच रखा जाता था। विंशोत्तरी दशा की गणना सत्ताईस नक्षत्रों पर ही आधारित है, इसलिए अभिजित उसमें नहीं आता।

पर अभिजित मुहूर्त आज भी उपयोग में है — वह दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ है, सूर्य के मध्याह्न के आसपास, और उसे दैनिक क्रम का एकमात्र स्वतः शुभ काल माना जाता है। दोनों का नाम एक है पर वे अलग अवधारणाएँ हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का विंशोत्तरी स्वामी सूर्य है। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हो तो जीवन सूर्य की महादशा से आरंभ होता है।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?
पहला पाद (धनु) — भे; दूसरा पाद (मकर) — भो; तीसरा पाद (मकर) — जा; चौथा पाद (मकर) — जी। नाम उस पाद के अक्षर से रखा जाता है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था।
उत्तराषाढ़ा का देवता कौन है?
विश्वेदेवा, यानी सभी देवता एक साथ। शास्त्र में इसे स्थायी विजय से जोड़ा गया है।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र किस राशि में आता है?
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र धनु 26°40′–मकर 10°00′ तक फैला है।
अभिजित नक्षत्र क्या है?
प्राचीन अट्ठाईस-नक्षत्र गणना में एक अतिरिक्त नक्षत्र, जो उत्तराषाढ़ा और श्रवण के बीच रखा जाता था। विंशोत्तरी दशा सत्ताईस नक्षत्रों पर आधारित है, इसलिए उसमें अभिजित नहीं आता। अभिजित मुहूर्त एक अलग अवधारणा है।
उत्तराषाढ़ा किन राशियों में आता है?
पहला पाद धनु में और शेष तीन मकर में।

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