राशि कैलकुलेटर (चंद्र राशि)

राशि कैलकुलेटर

मेरी असली राशि कौन-सी है?

वैदिक ज्योतिष में आपकी राशि वह है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था — सूर्य नहीं। गणना निरयण (लाहिरी) राशिचक्र पर होती है, जो पश्चिमी सायन राशिचक्र से लगभग 24 अंश अलग है। यही कारण है कि आपकी वैदिक राशि अक्सर उस राशि से अलग निकलती है जो आप अब तक मानते आए हैं।

चंद्र राशि ही असली राशि क्यों मानी जाती है

वैदिक ज्योतिष में मन का कारक चंद्रमा है, और राशिफल, दशा, साढ़े साती, कुंडली मिलान — लगभग सब कुछ चंद्रमा की स्थिति से निकलता है। इसीलिए जब कोई पूछता है 'आपकी राशि क्या है', तो पारंपरिक उत्तर चंद्र राशि होता है। पश्चिमी ज्योतिष सूर्य राशि से चलता है, और वहीं से वह अंतर शुरू होता है जो अधिकांश लोगों को उलझाता है।

24 अंश का अंतर — निरयण बनाम सायन

पश्चिमी ज्योतिष सायन राशिचक्र इस्तेमाल करता है, जो ऋतुओं पर टिका है। वैदिक ज्योतिष निरयण राशिचक्र इस्तेमाल करता है, जो वास्तविक तारों पर टिका है। पृथ्वी की धुरी के धीरे-धीरे घूमने के कारण दोनों के बीच अब लगभग 24 अंश का फ़र्क़ आ चुका है, जिसे अयनांश कहते हैं। इसका सीधा असर यह है कि निरयण पद्धति में आपकी सूर्य राशि अक्सर पिछली वाली निकलती है — और चंद्र राशि तो एक बिलकुल अलग स्थिति है।

राशि के साथ नक्षत्र क्यों देखा जाता है

बारह राशियाँ आकाश को बारह हिस्सों में बाँटती हैं, पर सत्ताईस नक्षत्र उसे और महीन बाँटते हैं — हर नक्षत्र 13°20′ का। एक ही राशि में जन्मे दो लोगों के नक्षत्र अलग हो सकते हैं, और चूँकि विंशोत्तरी दशा का पूरा क्रम जन्म नक्षत्र से तय होता है, यह अंतर छोटा नहीं है। इसीलिए यह कैलकुलेटर राशि के साथ नक्षत्र और पाद भी बताता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मेरी राशि वो क्यों नहीं जो मैं हमेशा से मानता आया हूँ?
आप शायद सूर्य राशि जानते हैं, और वह भी सायन पद्धति की। वैदिक ज्योतिष निरयण राशिचक्र पर चंद्रमा की राशि देखता है। दोनों अंतर मिलकर अक्सर एक अलग राशि देते हैं।
क्या राशि निकालने के लिए जन्म समय ज़रूरी है?
चंद्रमा एक राशि में करीब सवा दो दिन रहता है, इसलिए मोटा समय भी अक्सर काम कर जाता है। पर यदि जन्म उस समय के आसपास हुआ हो जब चंद्रमा राशि बदल रहा था, तो सही समय के बिना राशि बदल सकती है।
राशिफल किस राशि से पढ़ना चाहिए?
वैदिक परंपरा में चंद्र राशि से। इसीलिए इस साइट का राशिफल भी चंद्र राशि के आधार पर बनता है।
नाम की राशि और जन्म की राशि में क्या अंतर है?
नामकरण की परंपरा में बच्चे का नाम जन्म नक्षत्र के पाद के अनुसार एक निश्चित अक्षर से रखा जाता है, जिससे नाम की राशि निकलती है। यदि नाम उसी नियम से रखा गया हो तो दोनों मिल जाती हैं, वरना अलग हो सकती हैं — ज्योतिषीय गणना हमेशा जन्म की राशि से होती है।

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