भरणी नक्षत्र का स्वामी कौन है? देवता और विशेषताएँ

भरणी

भरणी नक्षत्र क्या है और उसकी विशेषताएँ क्या हैं?

भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र है और देवता यम। यह सत्ताईस नक्षत्रों में 2वाँ है, जो मेष 13°20′–26°40′ तक फैला है। जिसका प्रतीक योनि है और देवता यम — आरंभ और अंत दोनों एक साथ। जन्म के समय चंद्रमा इस नक्षत्र में हो तो विंशोत्तरी दशा क्रम शुक्र से आरंभ होता है।

योनि का प्रतीक और यम का देवत्व

भरणी अकेला नक्षत्र है जिसका प्रतीक योनि है और देवता यम — जन्म का प्रतीक और अंत के अधिपति, दोनों एक साथ। शास्त्रीय टीकाकार इसे किसी चीज़ को अंत तक धारण करने की क्षमता के रूप में पढ़ते हैं।

इसीलिए भरणी को सहनशीलता, उत्तरदायित्व वहन करने और संयम से जोड़ा जाता है। यम धर्म के अधिपति भी हैं, इसलिए इस नक्षत्र का नियम और मर्यादा से भी संबंध बताया गया है।

भरणी नक्षत्र के नाम अक्षर

भरणी नक्षत्र के चार पाद हैं और हर पाद का अपना नाम अक्षर है: पहला पाद (मेष) — ली; दूसरा पाद (मेष) — लू; तीसरा पाद (मेष) — ले; चौथा पाद (मेष) — लो। परंपरा में बच्चे का नाम उसी अक्षर से शुरू किया जाता है जिस पाद में जन्म के समय चंद्रमा था।

इसलिए केवल "भरणी नक्षत्र" जान लेना काफ़ी नहीं — चारों अक्षर (ली, लू, ले, लो) में से सही एक, पाद से ही तय होता है, और पाद हर 3°20′ पर बदल जाता है। ये अक्षर दृक पंचांग की नक्षत्र-पाद स्वर तालिका से लिए गए हैं।

शुक्र का स्वामित्व और बीस वर्ष की दशा

भरणी का विंशोत्तरी स्वामी शुक्र है, इसलिए इस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर जीवन शुक्र की बीस वर्ष की महादशा से आरंभ होता है — विंशोत्तरी की सबसे लंबी दशा।

यह अश्विनी से बड़ा अंतर है, जो उसी मेष राशि में ठीक पहले पड़ता है पर केतु की सात वर्ष की दशा देता है। एक ही राशि, और जीवन का पूरा दशा क्रम अलग।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भरणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
शुक्र। इस नक्षत्र में चंद्रमा हो तो जीवन शुक्र की बीस वर्ष की महादशा से आरंभ होता है।
भरणी नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?
पहला पाद (मेष) — ली; दूसरा पाद (मेष) — लू; तीसरा पाद (मेष) — ले; चौथा पाद (मेष) — लो। नाम उस पाद के अक्षर से रखा जाता है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था।
भरणी नक्षत्र का देवता कौन है?
यम, जिन्हें धर्म और अंत का अधिपति कहा गया है। प्रतीक योनि है, इसलिए यह नक्षत्र आरंभ और अंत दोनों से जुड़ा माना जाता है।
भरणी नक्षत्र किस राशि में आता है?
भरणी नक्षत्र मेष 13°20′–26°40′ तक फैला है।
भरणी और अश्विनी में क्या अंतर है?
दोनों मेष राशि में हैं, पर स्वामी अलग हैं — अश्विनी का केतु, भरणी का शुक्र। इसलिए दोनों का दशा क्रम और गण भी अलग है: अश्विनी देव गण की है, भरणी मनुष्य गण की।

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