आत्मकारक और दाराकारक कैलकुलेटर
आत्मकारक कैलकुलेटर
मेरी कुंडली में आत्मकारक और दाराकारक कौन-से ग्रह हैं?
जैमिनी पद्धति में सात ग्रहों को उनकी राशि में तय अंशों के अनुसार क्रम दिया जाता है। सबसे अधिक अंश वाला आत्मकारक कहलाता है — आत्मा का कारक — और सबसे कम अंश वाला दाराकारक, जीवनसाथी का कारक।
चर कारक — बदलने वाले कारक
पराशरी ज्योतिष में कारक स्थिर होते हैं — सूर्य हमेशा पिता का कारक, गुरु हमेशा संतान का। जैमिनी पद्धति में कारक हर कुंडली में बदलते हैं, इसलिए इन्हें चर कारक कहा जाता है। सातों ग्रहों के अंश (राशि छोड़कर, केवल 0 से 30 के भीतर) देखे जाते हैं और उन्हें घटते क्रम में लगाया जाता है। सबसे ऊपर आत्मकारक, सबसे नीचे दाराकारक।
आत्मकारक और दाराकारक क्या दिखाते हैं
आत्मकारक को जैमिनी में कुंडली का सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है — वह जीवन की मुख्य दिशा और आत्मा की प्रवृत्ति दिखाता है, और इष्ट देव की गणना भी इसी से शुरू होती है। दाराकारक को जीवनसाथी का कारक माना जाता है, और नवांश में उसकी स्थिति विवाह के पठन में देखी जाती है। दोनों पराशरी पद्धति के सप्तम भाव और शुक्र की जगह नहीं लेते, बल्कि उनके साथ पढ़े जाते हैं।
राहु को लेकर मतभेद
कुछ पद्धतियाँ सात कारक लेती हैं और कुछ आठ, राहु को जोड़कर। जहाँ राहु शामिल होता है वहाँ उसके अंश उल्टे गिने जाते हैं, क्योंकि वह वक्र गति से चलता है। यह असली मतभेद है, कोई त्रुटि नहीं — इसीलिए एक ही कुंडली के लिए दो कैलकुलेटर अलग दाराकारक बता सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- आत्मकारक क्या होता है?
- जैमिनी पद्धति में जिस ग्रह के अंश सबसे अधिक हों, वह आत्मकारक — आत्मा का कारक। इसे कुंडली का सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है।
- दाराकारक किसका कारक है?
- जीवनसाथी का। यह सबसे कम अंश वाला ग्रह होता है, और नवांश में उसकी स्थिति विवाह के पठन में देखी जाती है।
- चर कारक और स्थिर कारक में क्या अंतर है?
- पराशरी के कारक हर कुंडली में एक जैसे होते हैं — सूर्य हमेशा पिता का कारक। जैमिनी के चर कारक अंशों से तय होते हैं, इसलिए हर कुंडली में बदल जाते हैं।
- क्या राहु को कारकों में गिना जाता है?
- पद्धति पर निर्भर है। कुछ सात कारक लेती हैं, कुछ आठ। जहाँ राहु शामिल होता है वहाँ उसके अंश उल्टे गिने जाते हैं क्योंकि उसकी गति वक्र होती है।
