चित्रा नक्षत्र का स्वामी कौन है? देवता और विशेषताएँ
चित्रा
चित्रा नक्षत्र क्या है और उसकी विशेषताएँ क्या हैं?
चित्रा नक्षत्र का स्वामी मंगल है और देवता त्वष्टा / विश्वकर्मा। यह सत्ताईस नक्षत्रों में 14वाँ है, जो कन्या 23°20′–तुला 6°40′ तक फैला है। विश्वकर्मा का नक्षत्र, और वह जिससे चित्रपक्ष अयनांश का नाम बना है। जन्म के समय चंद्रमा इस नक्षत्र में हो तो विंशोत्तरी दशा क्रम मंगल से आरंभ होता है।
विश्वकर्मा और रचना का नक्षत्र
चित्रा के देवता त्वष्टा या विश्वकर्मा हैं, जिन्हें दिव्य शिल्पी कहा गया है, और प्रतीक चमकता रत्न। नाम का अर्थ ही चित्रित या विविधरंगी है। शास्त्र इसे रचना, सौंदर्यबोध और बनाने की क्षमता से जोड़ते हैं।
इसका विंशोत्तरी स्वामी मंगल है, जो शल्यक्रिया और यंत्र का भी कारक है। शिल्पी देवता और मंगल का स्वामित्व — यह संयोजन इस नक्षत्र को निर्माण और तकनीक दोनों से जोड़ता है।
चित्रा नक्षत्र के नाम अक्षर
चित्रा नक्षत्र के चार पाद हैं और हर पाद का अपना नाम अक्षर है: पहला पाद (कन्या) — पे; दूसरा पाद (कन्या) — पो; तीसरा पाद (तुला) — रा; चौथा पाद (तुला) — री। परंपरा में बच्चे का नाम उसी अक्षर से शुरू किया जाता है जिस पाद में जन्म के समय चंद्रमा था।
इसलिए केवल "चित्रा नक्षत्र" जान लेना काफ़ी नहीं — चारों अक्षर (पे, पो, रा, री) में से सही एक, पाद से ही तय होता है, और पाद हर 3°20′ पर बदल जाता है। ये अक्षर दृक पंचांग की नक्षत्र-पाद स्वर तालिका से लिए गए हैं।
चित्रा और लाहिरी अयनांश का संबंध
यह नक्षत्र भारतीय ज्योतिष की गणना पद्धति से सीधे जुड़ा है। लाहिरी अयनांश को चित्रपक्ष अयनांश भी कहा जाता है, क्योंकि उसका आधार यह है कि चित्रा तारा राशिचक्र के 180 अंश के सामने पड़े।
यही वह अयनांश है जिससे इस साइट की हर गणना होती है और जो भारत सरकार का मानक भी है। यानी चित्रा केवल एक नक्षत्र नहीं, पूरे निरयण राशिचक्र का संदर्भ बिंदु है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- चित्रा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
- चित्रा नक्षत्र का विंशोत्तरी स्वामी मंगल है। जन्म के समय चंद्रमा इसमें हो तो जीवन मंगल की महादशा से आरंभ होता है।
- चित्रा नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?
- पहला पाद (कन्या) — पे; दूसरा पाद (कन्या) — पो; तीसरा पाद (तुला) — रा; चौथा पाद (तुला) — री। नाम उस पाद के अक्षर से रखा जाता है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था।
- चित्रा नक्षत्र का देवता कौन है?
- त्वष्टा या विश्वकर्मा, जिन्हें दिव्य शिल्पी कहा गया है। प्रतीक चमकता रत्न है।
- चित्रा नक्षत्र किस राशि में आता है?
- चित्रा नक्षत्र कन्या 23°20′–तुला 6°40′ तक फैला है।
- चित्रपक्ष अयनांश का चित्रा नक्षत्र से क्या संबंध है?
- लाहिरी अयनांश को चित्रपक्ष भी कहते हैं क्योंकि उसका आधार यह है कि चित्रा तारा राशिचक्र के 180 अंश के सामने पड़े। यही भारत का मानक अयनांश है।
- चित्रा किन राशियों में आता है?
- पहले दो पाद कन्या में और शेष दो तुला में।
