ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी कौन है? देवता और विशेषताएँ

ज्येष्ठा

ज्येष्ठा नक्षत्र क्या है और उसकी विशेषताएँ क्या हैं?

ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी बुध है और देवता इंद्र। यह सत्ताईस नक्षत्रों में 18वाँ है, जो वृश्चिक 16°40′–30°00′ तक फैला है। नाम का अर्थ ही 'सबसे बड़ी' — इंद्र का नक्षत्र। जन्म के समय चंद्रमा इस नक्षत्र में हो तो विंशोत्तरी दशा क्रम बुध से आरंभ होता है।

ज्येष्ठा — वरिष्ठता का नक्षत्र

ज्येष्ठा का अर्थ है सबसे बड़ी या वरिष्ठ, और उसके देवता इंद्र हैं — देवताओं के राजा। प्रतीक गोल कवच या ताबीज़ है, जो रक्षा का सूचक है।

शास्त्र इसे वरिष्ठता, अधिकार और उसके साथ आने वाली ज़िम्मेदारी से जोड़ते हैं। इंद्र की कथाओं में विजय के साथ पद बनाए रखने का संघर्ष भी है, और टीकाकार इसी दोहरेपन को इस नक्षत्र में पढ़ते हैं।

ज्येष्ठा नक्षत्र के नाम अक्षर

ज्येष्ठा नक्षत्र के चार पाद हैं और हर पाद का अपना नाम अक्षर है: पहला पाद (वृश्चिक) — नो; दूसरा पाद (वृश्चिक) — या; तीसरा पाद (वृश्चिक) — यी; चौथा पाद (वृश्चिक) — यू। परंपरा में बच्चे का नाम उसी अक्षर से शुरू किया जाता है जिस पाद में जन्म के समय चंद्रमा था।

इसलिए केवल "ज्येष्ठा नक्षत्र" जान लेना काफ़ी नहीं — चारों अक्षर (नो, या, यी, यू) में से सही एक, पाद से ही तय होता है, और पाद हर 3°20′ पर बदल जाता है। ये अक्षर दृक पंचांग की नक्षत्र-पाद स्वर तालिका से लिए गए हैं।

वृश्चिक का अंतिम नक्षत्र और गंडमूल

ज्येष्ठा वृश्चिक राशि का अंतिम नक्षत्र है और राशि संधि पर समाप्त होती है, इसलिए यह गंडमूल नक्षत्रों में गिनी जाती है। इसके ठीक बाद मूल नक्षत्र और धनु राशि आरंभ होते हैं।

गंडमूल को लेकर लोक परंपरा में जो आशंका है, वह इस नक्षत्र पर भी लागू की जाती है। शास्त्रीय दृष्टि वही है — फल चंद्रमा और नक्षत्र स्वामी की स्थिति से पढ़ा जाता है, नाम से नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
बुध। इसमें चंद्रमा हो तो जीवन बुध की सत्रह वर्ष की महादशा से आरंभ होता है।
ज्येष्ठा नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?
पहला पाद (वृश्चिक) — नो; दूसरा पाद (वृश्चिक) — या; तीसरा पाद (वृश्चिक) — यी; चौथा पाद (वृश्चिक) — यू। नाम उस पाद के अक्षर से रखा जाता है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था।
ज्येष्ठा नक्षत्र के देवता कौन हैं?
ज्येष्ठा नक्षत्र के अधिष्ठाता इंद्र — देवराज हैं।
ज्येष्ठा नक्षत्र किस राशि में आता है?
ज्येष्ठा नक्षत्र वृश्चिक 16°40′–30°00′ तक फैला है।
ज्येष्ठा नक्षत्र का अर्थ क्या है?
सबसे बड़ी या वरिष्ठ। देवता इंद्र हैं और प्रतीक गोल कवच, जो रक्षा का सूचक है।
क्या ज्येष्ठा गंडमूल नक्षत्र है?
हाँ, क्योंकि यह वृश्चिक राशि के अंत में राशि संधि पर पड़ती है। गंडमूल का फल कुंडली में चंद्रमा और नक्षत्र स्वामी की स्थिति से पढ़ा जाता है।

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