कर्क राशि का स्वामी कौन है? स्वभाव और नक्षत्र

कर्क

कर्क राशि क्या है और उसकी विशेषताएँ क्या हैं?

कर्क राशि का स्वामी चंद्र है और इसमें पुनर्वसु (चौथा पाद), पुष्य, आश्लेषा नक्षत्र आते हैं। यह निरयण राशिचक्र की 4वीं राशि है — तत्त्व जल, गुण चर। वह राशि जहाँ गुरु उच्च होता है और जिसमें पुष्य नक्षत्र पड़ता है। कर्क चंद्रमा की अपनी राशि है, और 'राशि' शब्द भी उसी चंद्रमा की स्थिति से आता है — सूर्य की नहीं।

गुरु का उच्च और पुष्य — कर्क की दो बड़ी विशेषताएँ

कर्क में गुरु 5 अंश पर उच्च होता है, और इसी राशि में पुष्य नक्षत्र पड़ता है, जिसे शास्त्र में सत्ताईस में सबसे शुभ नक्षत्र कहा गया है। सबसे बड़ा शुभ ग्रह और सबसे शुभ नक्षत्र — दोनों एक ही राशि में।

इसी कारण कर्क को पोषण और रक्षा की असाधारण क्षमता वाली राशि माना गया है। चंद्रमा का स्वामित्व इसमें स्मृति, लगाव और भावनात्मक गहराई जोड़ता है।

कर्क राशि के नाम अक्षर

कर्क राशि के नाम अक्षर हैं: ही, हु, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो। ये नौ अक्षर इसलिए हैं क्योंकि हर राशि में नक्षत्रों के ठीक नौ पाद आते हैं, और परंपरा में हर पाद का एक अक्षर होता है। पुनर्वसु (चौथा पाद) — ही; पुष्य — हु, हे, हो, डा; आश्लेषा — डी, डू, डे, डो।

नाम का सही अक्षर राशि से नहीं, चंद्रमा के पाद से तय होता है। उदाहरण के लिए, कर्क राशि में चंद्रमा पुनर्वसु के चौथे पाद में हो तो अक्षर "ही" होगा, और आश्लेषा के चौथे पाद में हो तो "डो"। चंद्रमा किस पाद में था, यह जन्म के समय से तय होता है, इसलिए नामकरण से पहले कुंडली में पाद देख लेना चाहिए। ये अक्षर दृक पंचांग की नक्षत्र-पाद स्वर तालिका से लिए गए हैं।

मंगल यहाँ नीच क्यों होता है

मंगल कर्क में 28 अंश पर नीच होता है — जल राशि में अग्नि का कारक। शास्त्र इसे इस रूप में पढ़ते हैं कि यहाँ मंगल की सीधी, आक्रामक ऊर्जा को भावना का माध्यम मिलता है, और वह अपनी विशिष्ट शैली में काम नहीं कर पाती।

पर यहाँ भी नीचभंग लागू होता है। कर्क में नीच मंगल को निर्णय मानने से पहले भंग की जाँच आवश्यक है — यह वह काम है जो पूरी कुंडली का पठन करता है, कोई सामान्य नियम नहीं।

कर्क लग्न में मंगल का योगकारक होना

कर्क लग्न की एक विशेषता है कि मंगल यहाँ पंचम और दशम भाव, यानी एक त्रिकोण और एक केंद्र, दोनों का स्वामी होकर योगकारक बन जाता है। यह उस सामान्य धारणा के विपरीत है कि मंगल सदैव कठिनाई देता है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि कर्क चर राशि है, और चर राशि के लग्न को शास्त्र में आरंभ करने की प्रवृत्ति से जोड़ा गया है — केकड़े के प्रतीक के बावजूद, जिसे प्रायः केवल रक्षात्मकता से जोड़ लिया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कर्क राशि का स्वामी कौन है?
कर्क राशि का स्वामी चंद्र है। यह जल तत्त्व और चर गुण की राशि है।
कर्क राशि के नाम अक्षर कौन-से हैं?
कर्क राशि के नाम अक्षर ही, हु, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो हैं। इनमें से आपका अक्षर जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र-पाद से तय होता है।
कर्क राशि में कौन-कौन से नक्षत्र आते हैं?
कर्क राशि में पुनर्वसु (चौथा पाद), पुष्य, आश्लेषा नक्षत्र आते हैं। जन्म का चंद्रमा इनमें से जिस नक्षत्र में हो, उसी के स्वामी से पहली महादशा शुरू होती है।
कर्क राशि में कौन-सा ग्रह उच्च होता है?
गुरु, 5 अंश पर। इसी राशि में मंगल 28 अंश पर नीच भी होता है।
पुष्य नक्षत्र किस राशि में आता है?
कर्क में। शास्त्र में पुष्य को सत्ताईस नक्षत्रों में सबसे शुभ माना गया है, और उसका स्वामी शनि तथा देवता बृहस्पति हैं।
कर्क लग्न के लिए कौन-सा ग्रह योगकारक है?
मंगल, क्योंकि वह कर्क लग्न से पंचम और दशम, यानी एक त्रिकोण और एक केंद्र, दोनों का स्वामी है।

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