मिथुन राशि का स्वामी कौन है? स्वभाव और नक्षत्र
मिथुन
मिथुन राशि क्या है और उसकी विशेषताएँ क्या हैं?
मिथुन राशि का स्वामी बुध है और इसमें मृगशिरा (पाद 3–4), आर्द्रा, पुनर्वसु (पाद 1–3) नक्षत्र आते हैं। यह निरयण राशिचक्र की 3वीं राशि है — तत्त्व वायु, गुण द्विस्वभाव। द्विस्वभाव वायु राशि, जिसमें आर्द्रा नक्षत्र पूरा पड़ता है। भारतीय पद्धति में 'मिथुन राशि' तब कही जाती है जब जन्म के समय चंद्रमा मिथुन में हो; सूर्य की स्थिति अलग प्रश्न है।
द्विस्वभाव होने का असली अर्थ
मिथुन द्विस्वभाव राशि है — न चर की तरह आरंभ करने वाली, न स्थिर की तरह टिकने वाली, बल्कि दोनों के बीच पुल। शास्त्र में द्विस्वभाव राशियों को अनुकूलन, विनिमय और एक साथ दो चीज़ें सँभालने से जोड़ा गया है।
बुध का स्वामित्व इसमें भाषा, गणना और आदान-प्रदान जोड़ता है। मिथुन का शास्त्रीय गुण गहराई नहीं, गति और बहुमुखता है — और यह विशेषता है, कमी नहीं, जब तक उसे किसी दिशा की आवश्यकता न हो।
मिथुन राशि के नाम अक्षर
मिथुन राशि के नाम अक्षर हैं: का, की, कु, घ, ङ, छ, के, को, हा। ये नौ अक्षर इसलिए हैं क्योंकि हर राशि में नक्षत्रों के ठीक नौ पाद आते हैं, और परंपरा में हर पाद का एक अक्षर होता है। मृगशिरा (तीसरा, चौथा पाद) — का, की; आर्द्रा — कु, घ, ङ, छ; पुनर्वसु (पहला, दूसरा, तीसरा पाद) — के, को, हा।
नाम का सही अक्षर राशि से नहीं, चंद्रमा के पाद से तय होता है। उदाहरण के लिए, मिथुन राशि में चंद्रमा मृगशिरा के तीसरे पाद में हो तो अक्षर "का" होगा, और पुनर्वसु के तीसरे पाद में हो तो "हा"। चंद्रमा किस पाद में था, यह जन्म के समय से तय होता है, इसलिए नामकरण से पहले कुंडली में पाद देख लेना चाहिए। ये अक्षर दृक पंचांग की नक्षत्र-पाद स्वर तालिका से लिए गए हैं। आर्द्रा के कुछ पादों के अक्षर पर स्रोतों में मतभेद है, इसलिए वहाँ किसी जानकार से पुष्टि कर लेना ठीक रहेगा।
आर्द्रा — मिथुन की सबसे तीव्र परत
मिथुन में तीन नक्षत्र आते हैं और उनमें आर्द्रा पूरी इसी राशि में पड़ती है। आर्द्रा का स्वामी राहु है और उसके देवता रुद्र, इसलिए शास्त्र इसे मंथन और परिवर्तन से जोड़ते हैं।
मिथुन को केवल चंचल कह देना इसीलिए अधूरा है: एक ही राशि में मृगशिरा की खोज, आर्द्रा का मंथन और पुनर्वसु की पुनर्स्थापना — तीनों हैं। मिथुन का चंद्रमा किस नक्षत्र में है, यह जाने बिना पठन अधूरा रहता है।
मिथुन लग्न और बुध की स्थिति
मिथुन लग्न हो तो बुध लग्नेश और चतुर्थेश दोनों होता है। शास्त्र के अनुसार बुध जिस ग्रह के साथ हो वैसा हो जाता है, इसलिए ऐसी कुंडली में उसकी संगति असाधारण महत्व रखती है।
यह भी देखने योग्य है कि बुध सूर्य से दूर नहीं जाता, इसलिए अनेक कुंडलियों में अस्त रहता है। मिथुन लग्न में अस्त बुध का अर्थ लग्नेश का निर्बल होना है, और इसे पढ़े बिना निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मिथुन राशि का स्वामी कौन है?
- बुध। मिथुन लग्न में बुध लग्नेश और चतुर्थेश दोनों होता है।
- मिथुन राशि के नाम अक्षर कौन-से हैं?
- मिथुन राशि के नाम अक्षर का, की, कु, घ, ङ, छ, के, को, हा हैं। इनमें से आपका अक्षर जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र-पाद से तय होता है।
- मिथुन में कौन-कौन से नक्षत्र आते हैं?
- मृगशिरा के पाद 3–4, पूरी आर्द्रा, और पुनर्वसु के पाद 1–3। इनके स्वामी क्रमशः मंगल, राहु और गुरु हैं।
- द्विस्वभाव राशि का क्या अर्थ है?
- बारह राशियाँ तीन गुणों में बँटी हैं — चर, स्थिर और द्विस्वभाव। द्विस्वभाव राशियाँ मिथुन, कन्या, धनु और मीन हैं, और उन्हें अनुकूलन तथा संक्रमण से जोड़ा जाता है।
