मीन राशि का स्वामी कौन है? स्वभाव और नक्षत्र

मीन

मीन राशि क्या है और उसकी विशेषताएँ क्या हैं?

मीन राशि का स्वामी गुरु है और इसमें पूर्वाभाद्रपद (चौथा पाद), उत्तराभाद्रपद, रेवती नक्षत्र आते हैं। यह निरयण राशिचक्र की 12वीं राशि है — तत्त्व जल, गुण द्विस्वभाव। अंतिम राशि, जहाँ शुक्र उच्च और बुध नीच होता है। यहाँ भी 'मीन राशि' चंद्रमा की स्थिति है — वही जिससे दशा, राशिफल और मिलान सब निकलते हैं।

शुक्र का उच्च और बुध का नीच — एक ही राशि में

मीन में शुक्र 27 अंश पर उच्च होता है और बुध 15 अंश पर नीच। यह जोड़ी इस राशि के स्वभाव को सबसे स्पष्ट रूप से बताती है: यहाँ जो खिलता है वह है समर्पण, करुणा और सौंदर्य के प्रति खुलापन; और जो कठिनाई में पड़ता है वह है ठंडा विश्लेषण और चीज़ों को अलग-अलग करके देखना।

शास्त्र में मीन के बुध को ऐसे मन के रूप में पढ़ा गया है जो तर्क से नहीं, अंतर्ज्ञान से काम करता है। यह कमी का कथन नहीं, कार्यशैली का है — और यहाँ भी नीचभंग की जाँच पहले होनी चाहिए।

मीन राशि के नाम अक्षर

मीन राशि के नाम अक्षर हैं: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, च, ची। ये नौ अक्षर इसलिए हैं क्योंकि हर राशि में नक्षत्रों के ठीक नौ पाद आते हैं, और परंपरा में हर पाद का एक अक्षर होता है। पूर्व भाद्रपद (चौथा पाद) — दी; उत्तर भाद्रपद — दू, थ, झ, ञ; रेवती — दे, दो, च, ची।

नाम का सही अक्षर राशि से नहीं, चंद्रमा के पाद से तय होता है। उदाहरण के लिए, मीन राशि में चंद्रमा पूर्व भाद्रपद के चौथे पाद में हो तो अक्षर "दी" होगा, और रेवती के चौथे पाद में हो तो "ची"। चंद्रमा किस पाद में था, यह जन्म के समय से तय होता है, इसलिए नामकरण से पहले कुंडली में पाद देख लेना चाहिए। ये अक्षर दृक पंचांग की नक्षत्र-पाद स्वर तालिका से लिए गए हैं।

अंतिम राशि और मोक्ष का संबंध

मीन राशिचक्र की बारहवीं और अंतिम राशि है, और शास्त्र में इसे विसर्जन तथा मोक्ष से जोड़ा जाता है। कालपुरुष की कल्पना में मीन बारहवें भाव के अनुरूप है, जो व्यय, एकांत और मुक्ति का भाव है।

इसका प्रतीक भी यही कहता है — विपरीत दिशाओं में तैरती दो मछलियाँ, जिन्हें टीकाकार दो दिशाओं में खिंचने के रूप में पढ़ते हैं। द्विस्वभाव गुण इसी को और स्पष्ट करता है।

रेवती — सत्ताईसवाँ नक्षत्र इसी राशि में समाप्त होता है

रेवती नक्षत्र मीन में पड़ता है और वही पूरे नक्षत्र चक्र का अंतिम नक्षत्र है — 360 अंश यहीं पूरे होते हैं। उसका स्वामी बुध और देवता पूषन हैं, जिन्हें मार्ग का रक्षक कहा गया है।

यह संयोग ध्यान देने योग्य है: चक्र की अंतिम राशि में अंतिम नक्षत्र, और उसका देवता वह जो यात्रा में रक्षा करता है। शास्त्र में रेवती को पूर्णता और सुरक्षित समापन से जोड़ा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मीन राशि का स्वामी कौन है?
गुरु। वह धनु का भी स्वामी है, पर उसका मूलत्रिकोण धनु में है, मीन में नहीं।
मीन राशि के नाम अक्षर कौन-से हैं?
मीन राशि के नाम अक्षर दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, च, ची हैं। इनमें से आपका अक्षर जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र-पाद से तय होता है।
मीन राशि में कौन-कौन से नक्षत्र आते हैं?
मीन राशि में पूर्वाभाद्रपद (चौथा पाद), उत्तराभाद्रपद, रेवती नक्षत्र आते हैं। जन्म का चंद्रमा इनमें से जिस नक्षत्र में हो, उसी के स्वामी से पहली महादशा शुरू होती है।
मीन राशि में कौन-सा ग्रह उच्च होता है?
शुक्र, 27 अंश पर। इसी राशि में बुध 15 अंश पर नीच होता है।
रेवती नक्षत्र किस राशि में आता है?
मीन में, और वह सत्ताईस नक्षत्रों में अंतिम है। उसका स्वामी बुध और देवता पूषन हैं।

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