वृश्चिक राशि का स्वामी कौन है? स्वभाव और नक्षत्र
वृश्चिक
वृश्चिक राशि क्या है और उसकी विशेषताएँ क्या हैं?
वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है और इसमें विशाखा (चौथा पाद), अनुराधा, ज्येष्ठा नक्षत्र आते हैं। यह निरयण राशिचक्र की 8वीं राशि है — तत्त्व जल, गुण स्थिर। वह राशि जहाँ चंद्रमा नीच होता है — मन के कारक के लिए सबसे कठिन भूमि। 'वृश्चिक राशि' चंद्रमा की स्थिति से तय होती है — और यही वह राशि है जहाँ चंद्रमा नीच होता है, इसलिए यह अंतर यहाँ खास मायने रखता है।
चंद्रमा यहाँ नीच होता है, और यही इस राशि की कुंजी है
वृश्चिक में चंद्रमा 3 अंश पर नीच होता है — ठीक उसी अंश पर जिस पर वह वृषभ में उच्च होता है। मन का कारक यहाँ अपनी सबसे कठिन भूमि पर है, और यही कारण है कि शास्त्र में भावनात्मक जीवन को इस राशि का सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र कहा गया है।
इसका अर्थ यह नहीं कि वृश्चिक चंद्र राशि वालों के लिए कुछ बुरा तय है। इसका अर्थ यह है कि वृश्चिक का चंद्रमा पढ़ते समय उसका पक्ष, उस पर दृष्टि और नीचभंग — तीनों देखे बिना कोई निष्कर्ष निकालना अधूरा है।
वृश्चिक राशि के नाम अक्षर
वृश्चिक राशि के नाम अक्षर हैं: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू। ये नौ अक्षर इसलिए हैं क्योंकि हर राशि में नक्षत्रों के ठीक नौ पाद आते हैं, और परंपरा में हर पाद का एक अक्षर होता है। विशाखा (चौथा पाद) — तो; अनुराधा — ना, नी, नू, ने; ज्येष्ठा — नो, या, यी, यू।
नाम का सही अक्षर राशि से नहीं, चंद्रमा के पाद से तय होता है। उदाहरण के लिए, वृश्चिक राशि में चंद्रमा विशाखा के चौथे पाद में हो तो अक्षर "तो" होगा, और ज्येष्ठा के चौथे पाद में हो तो "यू"। चंद्रमा किस पाद में था, यह जन्म के समय से तय होता है, इसलिए नामकरण से पहले कुंडली में पाद देख लेना चाहिए। ये अक्षर दृक पंचांग की नक्षत्र-पाद स्वर तालिका से लिए गए हैं।
मंगल की दूसरी राशि — मेष से किस तरह अलग
मंगल मेष और वृश्चिक दोनों का स्वामी है, पर शास्त्र में दोनों का काम अलग बताया गया है। मेष चर अग्नि है — सीधी, दिखने वाली पहल। वृश्चिक स्थिर जल है — वही तीव्रता, पर भीतर संचित और तब तक अप्रकट जब तक काम पूरा न हो।
इसीलिए वृश्चिक को अनुसंधान, गहराई और उन विषयों से जोड़ा जाता है जहाँ दूसरे जाना नहीं चाहते। मंगल का मूलत्रिकोण यहाँ नहीं, मेष में 0°–12° तक है, पर स्वराशि होने का बल यहाँ भी पूरा है।
ज्येष्ठा और अनुराधा — दो अलग स्वभाव, एक राशि
वृश्चिक में अनुराधा पूरी और ज्येष्ठा पूरी आती हैं, और दोनों का स्वभाव शास्त्र में बहुत अलग बताया गया है। अनुराधा के देवता मित्र हैं और उसे सहयोग तथा मैत्री से जोड़ा जाता है; ज्येष्ठा के देवता इंद्र हैं और उसे वरिष्ठता तथा प्रतिस्पर्धा से।
यह उदाहरण है कि केवल राशि से पठन क्यों अधूरा रहता है। एक ही वृश्चिक राशि में अनुराधा का चंद्रमा शनि की महादशा से जीवन शुरू करेगा और ज्येष्ठा का बुध की — दशा क्रम ही अलग हो जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- वृश्चिक राशि का स्वामी कौन है?
- मंगल। वह मेष का भी स्वामी है, पर शास्त्र में वृश्चिक में उसका कार्य गहराई और संचित तीव्रता से अधिक जोड़ा जाता है।
- वृश्चिक राशि के नाम अक्षर कौन-से हैं?
- वृश्चिक राशि के नाम अक्षर तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू हैं। इनमें से आपका अक्षर जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र-पाद से तय होता है।
- वृश्चिक में कौन-कौन से नक्षत्र आते हैं?
- विशाखा का चौथा पाद, पूरी अनुराधा और पूरी ज्येष्ठा। इनके स्वामी क्रमशः गुरु, शनि और बुध हैं।
- वृश्चिक राशि में कौन-सा ग्रह नीच होता है?
- चंद्रमा, 3 अंश पर — ठीक उसी अंश पर जिस पर वह वृषभ में उच्च होता है।
