सिंह राशि का स्वामी कौन है? स्वभाव और नक्षत्र

सिंह

सिंह राशि क्या है और उसकी विशेषताएँ क्या हैं?

सिंह राशि का स्वामी सूर्य है और इसमें मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी (पहला पाद) नक्षत्र आते हैं। यह निरयण राशिचक्र की 5वीं राशि है — तत्त्व अग्नि, गुण स्थिर। एकमात्र राशि जिसमें किसी ग्रह का न उच्च है न नीच। सिंह सूर्य की राशि है, पर 'सिंह राशि' होने का अर्थ फिर भी यही है कि जन्म के समय चंद्रमा सिंह में था।

एकमात्र राशि जहाँ कोई ग्रह न उच्च होता है न नीच

बारह राशियों में सिंह अकेली है जिसमें किसी भी ग्रह का उच्च या नीच नहीं पड़ता। शास्त्रीय टीकाकार इसे इस रूप में पढ़ते हैं कि यह राशि किसी ग्रह के बल पर नहीं टिकी — यहाँ कोई ग्रह न विशेष रूप से ऊँचा उठता है, न गिरता है।

यह वह एक तथ्य है जो सिंह को याद रखने योग्य बनाता है, और यह उसके स्वामी सूर्य के स्वभाव से मेल भी खाता है: सूर्य केवल सिंह का स्वामी है, किसी दूसरी राशि का नहीं — यह भी उसकी अपनी विशेषता है।

सिंह राशि के नाम अक्षर

सिंह राशि के नाम अक्षर हैं: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे। ये नौ अक्षर इसलिए हैं क्योंकि हर राशि में नक्षत्रों के ठीक नौ पाद आते हैं, और परंपरा में हर पाद का एक अक्षर होता है। मघा — मा, मी, मू, मे; पूर्व फाल्गुनी — मो, टा, टी, टू; उत्तर फाल्गुनी (पहला पाद) — टे।

नाम का सही अक्षर राशि से नहीं, चंद्रमा के पाद से तय होता है। उदाहरण के लिए, सिंह राशि में चंद्रमा मघा के पहले पाद में हो तो अक्षर "मा" होगा, और उत्तर फाल्गुनी के पहले पाद में हो तो "टे"। चंद्रमा किस पाद में था, यह जन्म के समय से तय होता है, इसलिए नामकरण से पहले कुंडली में पाद देख लेना चाहिए। ये अक्षर दृक पंचांग की नक्षत्र-पाद स्वर तालिका से लिए गए हैं।

सूर्य का एकमात्र स्वामित्व

सूर्य और चंद्रमा — केवल यही दो ग्रह हैं जिनकी एक-एक राशि है; शेष पाँच ग्रहों की दो-दो। सूर्य की वह एक राशि सिंह है। इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि सिंह लग्न में सूर्य केवल लग्नेश होता है, और उसकी स्थिति किसी दूसरे भाव के स्वामित्व से बँटी नहीं होती।

इसीलिए सिंह लग्न की कुंडली में सूर्य का बल पूरी कुंडली का बल पढ़ने के बराबर हो जाता है। सूर्य अस्त नहीं होता, इसलिए यहाँ वह प्रश्न भी नहीं उठता जो बुध या शुक्र के लग्नेश होने पर उठता है।

मघा और पितृ पक्ष का संबंध

सिंह में तीन नक्षत्र पड़ते हैं और उनमें पहला मघा है, जिसके देवता पितर हैं। शास्त्र में मघा को वंश, परंपरा और पूर्वजों से जोड़ा जाता है, और इसीलिए पितृ दोष से जुड़े विश्लेषणों में यह नक्षत्र बार-बार आता है।

मघा का स्वामी केतु है, इसलिए मघा में जन्मे व्यक्ति की पहली महादशा केतु की सात वर्ष की होती है — जबकि पूर्वाफाल्गुनी में जन्मे की शुक्र की बीस वर्ष की। एक ही राशि में यह अंतर बहुत बड़ा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सिंह राशि का स्वामी कौन है?
सूर्य, और सिंह उसकी एकमात्र राशि है। सूर्य और चंद्रमा ही ऐसे दो ग्रह हैं जिनकी एक-एक राशि है।
सिंह राशि के नाम अक्षर कौन-से हैं?
सिंह राशि के नाम अक्षर मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे हैं। इनमें से आपका अक्षर जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र-पाद से तय होता है।
सिंह राशि में कौन-कौन से नक्षत्र आते हैं?
सिंह राशि में मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी (पहला पाद) नक्षत्र आते हैं। जन्म का चंद्रमा इनमें से जिस नक्षत्र में हो, उसी के स्वामी से पहली महादशा शुरू होती है।
सिंह राशि में कोई ग्रह उच्च क्यों नहीं होता?
सिंह बारह में एकमात्र राशि है जिसमें किसी ग्रह का न उच्च है न नीच। शास्त्रीय टीकाओं में इसे इस राशि के अपनी शर्तों पर खड़े होने के रूप में पढ़ा जाता है।
मघा नक्षत्र किस राशि में आता है?
सिंह में। मघा के देवता पितर हैं और उसका विंशोत्तरी स्वामी केतु है।

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