ग्रह मैत्री कूट
ग्रह मैत्री कूट
कुंडली मिलान में ग्रह मैत्री कूट क्या जाँचता है?
ग्रह मैत्री 36 में से 5 अंक रखता है और दोनों चंद्र राशियों के स्वामियों के बीच नैसर्गिक मित्रता की तुलना करता है। परस्पर मित्र होने पर पूरे 5 अंक मिलते हैं, एकतरफ़ा मित्रता या सम भाव कम अंक देते हैं, और परस्पर शत्रु शून्य। यह भकूट दोष के निवारण में भी सबसे अधिक उद्धृत कूट है।
ग्रहों के बीच नैसर्गिक मित्रता
शास्त्रीय ज्योतिष सातों ग्रहों के बीच नैसर्गिक मित्रता, शत्रुता और सम भाव की एक तय तालिका रखती है — सूर्य चंद्र, मंगल और गुरु का मित्र है और शुक्र-शनि का शत्रु, और इसी तरह हर ग्रह के लिए। ग्रह मैत्री दोनों साथियों की चंद्र राशि के स्वामी को उसी तालिका में देखती है। जब दोनों स्वामी परस्पर मित्र हों तो कूट पूरे पाँच अंक देता है; परस्पर शत्रुता पर कोई नहीं। जहाँ दोनों की चंद्र राशि एक ही हो, वहाँ स्वामी भी एक ही ग्रह होता है, जो परिभाषा से ही पूर्ण अंक देता है।
यह कूट अपने पाँच अंकों से आगे क्यों मायने रखता है
ग्रह मैत्री दोहरी भूमिका निभाता है। अपने पाँच अंकों के अलावा, एक बलवान ग्रह मैत्री उन दो शर्तों में से एक है जो सबसे अधिक भकूट दोष के निवारण के रूप में उद्धृत की जाती है — भकूट दोष अन्यथा पद्धति का दूसरा सबसे बड़ा दंड है, सात अंकों का। इसका अर्थ है कि यह कूट असल में पाँच नहीं बल्कि बारह अंक जितना प्रभावी हो सकता है, जो किसी भकूट विफलता पर प्रतिक्रिया देने से पहले इसे देखने का अच्छा कारण है।
नैसर्गिक मित्रता, तात्कालिक मित्रता नहीं
शास्त्रीय ग्रंथ नैसर्गिक (स्थायी) मित्रता को तात्कालिक (कुंडली-विशेष) मित्रता से अलग मानते हैं, जो किसी विशेष कुंडली में दो ग्रहों की दूरी पर आधारित होती है। अष्टकूट नैसर्गिक तालिका ही प्रयोग करता है। गुण-स्कोर से आगे जाने वाला पूर्ण विश्लेषण दोनों कुंडलियों की तात्कालिक मित्रता भी देखता है, जो तय तालिका से अलग हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ग्रह मैत्री कूट कितने अंक का है?
- छत्तीस में से पाँच अंक।
- अगर दोनों की चंद्र राशि एक ही हो तो?
- तब राशि-स्वामी दोनों के लिए एक ही ग्रह होता है, जिसे पूर्ण मित्रता मानकर पूरे पाँच अंक दिए जाते हैं।
- क्या ग्रह मैत्री भकूट दोष का निवारण करता है?
- एक बलवान ग्रह मैत्री उन दो शर्तों में से एक है जो सबसे अधिक भकूट दोष के निवारण के रूप में उद्धृत की जाती हैं, दूसरी है दोनों चंद्र राशियों का एक ही स्वामी होना। परंपराएँ इसे कितनी सख्ती से लागू करें, इसमें भिन्न हैं, इसीलिए परिणाम इसे चुपचाप लागू करने के बजाय निवारण को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
- कौन-सी मित्रता तालिका प्रयोग होती है — नैसर्गिक या तात्कालिक?
- अष्टकूट नैसर्गिक (स्थायी) तालिका प्रयोग करता है, जो तय है। तात्कालिक मित्रता किसी विशेष कुंडली में ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करती है और पूर्ण विश्लेषण का हिस्सा है।
